vकोरोना वायरस / मासूम बच्चे को गोद में लिए नंगे पैर 70 किमी का सफर तय कर रही मां, बोली- बाहर मजदूरी बंद, घर पहुंचेंगे तो जैसे-तैसे जी लेंगे



शिवपुरी। लॉक डाउन की वजह से दूसरे राज्यों में रहकर कामकाज करने वाले लोग अपने घर वापसी कर रहे हैं। इसलिए सड़कों आवाजाही बदस्तूर जारी है। घर पहुंचने की जद्दोजहद में हजारों लोग भटक रहे हैं। सुरक्षित घर पहुंचने के लिए लोग सैकड़ों किमी का सफर पैदल ही तय करने को मजबूर हैं। इन्हीं में शामिल हैं बैराड़ की कुसुम आदिवासी। वे अपने तीन साल के बच्चे को गोद में लिए शिवपुरी पहुंचीं। 


उनके साथ कई आदिवासी परिवार थे जो भिंड जिले में आलू खुदाई का काम करने गए थे। लॉकडाउन के बाद काम बंद हो गया तो खाने के लाले पड़ गए। मजबूर होकर सभी आदिवासी परिवार भिंड से पैदल ही निकल पड़े। जैसे-तैसे दतिया पहुंचे। वहां से किसी तरह कोटा-झांसी फोरलेन आए, फिर ट्रक में बैठकर कोटा नाके के आगे एप्रोच रोड पर उतर गए। यहां से 17 किमी पैदल चलकर शिवपुरी आए। कुसुम को बैराड़ जाना है। इसलिए वे अन्य आदिवासियों के साथ बच्चे को गाेद में लिए पैदल ही आगे बढ़ गईं। करीब 70 किमी का सफर नंगे पैर ही तय कर रही हैं। कुसुम का कहना है कि घर पहुंच जाएंगे तो जैसे-तैसे जी लेंगे। बाहर तो मजदूरी बंद होने से भूखे मरने की नौबत आ गई थी। अभी हजारों लोग लगातार आते जा रहे हैं।



सिर पर गृहस्थी का बोझ, मां-बेटे नंगे पैर 60 किमी पैदल चलकर शिवपुरी आए
मनियर की रहने वालीं धानूबाई आदिवासी अपने बेटे चंदन के साथ आलू खोदने के लिए भिंड गईं थी। लॉकडाउन हो गया ताे वे ट्रक में बैठकर वहां से घर के लिए निकल पड़ीं। रास्ते में मोहना के पास पुलिस ने रोक लिया। रात में माेहना से मां-बेटे पैदल ही शिवपुरी के लिए चल दिए। सिर पर गृहस्थी का बोझा लेकर दोनों नंगे पैर रातभर पैदल चले और साेमवार की सुबह 11 बजे 60 किमी का सफर तय कर जैसे-तैसे शिवपुरी पहुंचे।


जैसे-तैसे लौटकर आए, अब गांव में घुसने से रोक रहे ग्रामीण, बोले- पहले चेकअप कराकर आओ
दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूर वर्ग लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित हैं। शिवपुरी जिले में अपने गांव लौटे लोगों को गांव वाले संक्रमण के डर से गांव के अंदर ही घुसने नहीं दे रहे। ट्रक चालक रामअवतार पाल निवासी भानगढ़ ने बताया कि वे महाराष्ट्र से लौटकर आए हैं। घर वालों से फोन पर संपर्क किया तो बताया गया कि गांव वाले घुसने नहीं देंगे। इसलिए पहले अस्पताल जाकर चेक कराकर आओ। सोमवार को वे जिला अस्पताल पहुंचे। पर्चे बनवाने के लिए ओपीडी काउंटर के बाहर लंबी लाइन में लगना पड़ा। इसी तरह सेंवढ़ा हिम्मतपुर निवासी शिशुपाल राजस्थान के जालौर जिले में फैक्टरी बंद होने के कारण लौटकर आए हैं। जांच के बाद ही वे घर जा सकेंगे। सतनवाड़ा के पास गांव में चित्तौलगढ़ से आठ लड़कों को ग्रामीणों ने गांव में घुसने नहीं दिया।



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